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Saturday, 22 August 2015

वक़्त के साथ ऐ इंसान तू बदल गया








मुझ पर यह अक्सर इलज़ाम क्यों आया की वक़्त के साथ ऐ इंसान तू बदल गया 

वक़्त बदला और इसके साथ साथ बदलते चले गए मिज़ाज़ .
मिज़ाज़  सिर्फ इंसान के ही नहीं बदले
मिज़ाज़ तो मौसम ने भी बदले 
धरती ने भी अपना रुख बदला तो
कुदरत ने  भी अपना बदला हुआ रंग इंसान को दिखाया
वक़्त  के   साथ  बदलने  का  हुनर  तो  हर कोई  रखता  है ..
आसमान के सितारे नदियों के किनारे भी वक़्त के साथ बदलते ही रहते है 
फिर मैं  तो इंसान हूँ.........................................!!!! 
मुझ पर यह अक्सर इलज़ाम क्यों आया की वक़्त के साथ ऐ इंसान तू बदल गया ............!!!!

वक़्त की रफ़्तार के साथ  बदलना ही अच्छा है 
बदलते  वक़्त  के  साथ  नयी  दुनिया  आएगी ......
उस  दुनिया  में  शायद  हर  चीज़  बदल  जाएगी .....
बदलता वक़्त अक्सर   इंसान के  हालात   बदल  देता है
कुछ कहे अनकहे ज़िन्दगी  के  सवालात  ही  बदल  देता है 
लोगों  के  अपने  ख़यालात  बदल    देता है
फिर मैं  तो इंसान हूँ.........................................!!!! 
मुझ पर यह अक्सर इलज़ाम क्यों आया की वक़्त के साथ ऐ इंसान तू बदल गया ............!!!!

कभी  एक  लम्हा  ऐसा  भी  आता  है ,
जिसमे  बीता  हुआ  कल  नज़र  आता  है ,
बस  यादे  रह  जाती  है  याद  करने  के लिए 
और  वक़्त   सब  कुछ  लेकर  गुज़र  जाता  है 
बीते हुए वक़्त के हर पल को अपनी यादों में  समेट लेने का अंदाज़ ही अच्छा है  
वक़्त  के  साथ  इंसान   का बदलना ही अच्छा है 
क्यों  की  वक़्त  इंसान  को  जीना  सीखा  देता  है
घाव  गहरे  भी  हो  जितने  वो  भर  जाते  हैं , 
वक़्त बदलता  तो अरमान और तमन्नाये  भी बदलती है 
एक निराश जिंदगी से खुशाल जिंदगी के सपने भी तो दिखाता  है वक़्त
फिर मैं  तो इंसान हूँ.........................................!!!! 
मुझ पर यह अक्सर इलज़ाम क्यों आया की वक़्त के साथ ऐ इंसान तू बदल गया ............!!!! 



Monday, 13 July 2015

गुजरे वक़्त के वह कुछ पल ......

गुजरे वक़्त  के वह कुछ  पल ..........

गुजरे पल के वह पल जब याद  आते हैं तो
अनायास ही यादें बचपन की गलियों  में  अठखेलियां करने लगती हैं !

खूबसूरत वक़्त था जब छोटे थे न कोई पाबन्दी  न कोई रोक टॉक , न चिंता न ही कोई सोच !
दिनभर मस्ती और मौज , कभी बैल गाड़ी की सवारी तो  कभी ट्रेक्टर पर घूमना
खेत खलिआनो के तो न जाने कितने ही चक्कर लगा आते थे ,
अमरुद और आम के  बागों  से चुपके से अमरुद और आम चुराना
और अपने आप को बचाने के लिए संगी साथियों के नाम लगाना!
वह लड़ना झगड़ना , वह रूठना मनाना !
वह झूठी शिकायते लगाकर एक दूसरे को चिड़ाना ,
वाकई   गुजरे पल के वह पल जब याद  आते हैं तो   अनायास ही यादें बचपन की गलियों  में  अठखेलियां  करने लगती हैं!

वह बारिश में भीगना और कॉपी के पन्नो की अनगिनत किश्तियाँ पानी में चलाना,
एक दूसरे की किश्ती को पानी में डुबाना
और फिर जोर  जोर से  खिलखिलाकर हँसना,
जब कोई नाराज़ होता तो  दौड़ भाग कर उससे दूर निकल जाना !
सच गुजरे पल के वह पल जब याद  आते हैं तो
अनायास ही यादें बचपन की गलियों  में  अठखेलियां करने करने लगती हैं!

वह गुड्डे गुड्डियो की शादी करना ,
घर घर खेलना और अनगिनत खुशियों को अपने दामन में समेट लेना
मिटटी के खिलौने  बनाना और अपने कलाकारी को खुद ही निहारना ,
कभी मिटटीं के घरोंदा बनाना और फिर पल में ही सब समेट लेना ,
 अक्सर बचपन की उस मासूमियत को शायद आज भी मन में बिठाये  रखा है !
वाकई   गुजरे पल के वह पल जब याद  आते हैं
तो अनायास ही यादें बचपन की गलियों  में  अठखेलियां करने करने लगती हैं!

Sunday, 12 July 2015

वक़्त के साथ कुछ किस्से जो हमे अक्सर प्रेरित कर जाया करते हैं!!!

railway station : A traditional railway station hanging clock isolated on white



एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी, लड़के इधर आ।
लड़का दौड़कर आया।
उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?
यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।
उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराय मौन रहा।
जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।
महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।
बोले : लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?
वह लड़का बोला,
महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।
महात्मा ने पूछा -
लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।
लड़के ने जवाब दिया -
महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।
वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?
पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।
वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।
पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.
अगर भगवान नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर भगवान हे तो फिर फिक्र क्यों ???

[ यह कहानी मैंने फेसबुक पर पढ़ी और मुझे बहुत प्रेरित करती है ]

Sunday, 5 July 2015

वक़्त की पाबन्दी

कहतें है की वक़्त किसी का इंतज़ार नहीं करता........ घड़ी की सूइयां कभी नहीं रूकती ..............जो वक़्त की क़दर करता है वक़्त उस क़े काम आता है.......और जो वक़्त की क़दर नहीं करता वक़्त उससे कोसों दूर निकल जाता है! वक़्त एक बेहद ही नायाब दौलत है! वह हर इंसान दुनिया में इज़्ज़त हासिल कर सकता है जो वक़्त का पाबंद है, उस की क़दर करता है और वक़्त जाया नहीं करता! हमें चाहिए क़े हम हर काम वक़्त पर करें और यह आदत बना लें की वक़्त बर्बाद ना करें! हर काम अपने मुक़रर वक़्त पर करें! हमे चाहिए की आज का काम आज ही करें उसे कल पर नहीं टालें, वक़्त की इस पाबन्दी को जिसने भी अपनाया, सफलता ने उसको अपनाया!
वो लोग जो वक़्त की क़दर करते है वो हकीकत में एक क़ीमती खज़ाना जुटा लेते हैं! यह बेहद ही जरूरी है की हम वक़्त क़े पाबन्द होकर खूब मेहनत करें तो हम हर मंज़िल हासिल कर सकते हैं! इस संसार में हम अपना नाम रोशन कर सकते है, इज़्ज़त की ज़िन्दगी बसर कर सकते हैं! जिसने भी वक़त की पाबन्दी को माना वह कभी भी किसी का मोहताज़ नहीं हुआ!




time management : man running around the clock  illustration


कहतें है की कुदरत भी वक़्त की पाबंद है! हर मौसम अपने वक़्त पर आता है! सूरज, चाँद, तारे और दिन रात भी वक़्त क़े पाबंद हैं! यदि सूरज अपने समय पर ना आये तो संसार में त्राहि त्राहि हो जाएगी! इस संसार का समय चक्र ही बदल जायेगा!

वक़्त ना थमा है और ना ही इसका ऐसा ही कोई इरादा है, बस जरूरी है की इंसान वक़्त क़े साथ चलना सीख ले! 

"सच ही है की गुज़रा हुआ वक़्त कभी किसी कीमत पर भी वापस नहीं आता" 

इसलिए ऐ बन्दे वक़्त का तू गुलाम हो जा, फिर देख जिंदगी जीने का अंदाज़ ही बदल जायेगा!